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नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (NARAKAS)

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (NARAKAS)

Nagar Rajbhasha Karyanvayan Samiti (Town Official Language Implementation Committee - TOLIC)

भारत सरकार की राजभाषा नीति (Official Language Policy) का उद्देश्य केंद्र सरकार के कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), स्वायत्त निकायों तथा बैंकों में राजभाषा हिंदी (Official Language Hindi) के प्रगतिशील प्रयोग (Progressive Use of Hindi) को बढ़ावा देना है।

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के राजभाषा विभाग (Department of Official Language) द्वारा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों (NARAKAS/TOLIC) का गठन किया जाता है। यह समिति स्थानीय स्तर पर विभिन्न केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के मध्य समन्वय स्थापित कर राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हिंदी का प्रयोग एवं समान्य नियम

हिंदी का प्रयोग एवं समान्य नियम


1. संविधान का अनुच्छेद - 343(i) :- भारत संघ की राजभाषा में लिखी देवनागरी लिपि हिंदी होगी तथा संघ के सरकारी कार्यो में भारतीय अंको के अन्तर्राष्ट्रीय रूपों का प्रयोग होगा।

2. संविधान का अनुच्छेद - 343 (ii) :- संविधान लागू होने से 15 वर्ष तक (26 जनवरी 1950 से 26 जनवरी 1965 तक ) अंग्रेजी भाषा सरकारी कार्यो में पूर्ववत चलती रहेगी।  इस अवधि में राष्ट्रपति सरकारी कार्यो में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी तथा भारतीय अंको के अन्तर्राष्ट्रीय रूप के स्थान पर देवनागरी रूप के प्रयोग को आदेश व्दारा प्राधिकृत कर सकते है। 

राजभाषा समितिया (Rajbhasha Committee)

राजभाषा समितियां

संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए, हिंदी भाषा के उत्तरोत्तर प्रयोग पर ध्यान रखने के लिए तथा औद्योगिक, संस्कृतिक एवं वैज्ञानिक उन्नति के सम्पर्क को ध्यान में रखते हुए, राजभाषा के प्रगामी प्रयोग का जायजा लेने के लिए, इन समितियों का गठन किया गया है । ये समितियाँ भारत सरकार की राजभाषा नीति तथा संसद व्दारा पारित राजभाषा अधिनियम, 1963 एवं राजभाषा नियम, 1976 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करेगी। 

 राजभाषा समितियां निम्नलिखित है :-

1. केन्द्रीय हिंदी समिति :- 
  • यह राजभाषा की सर्वोच्च समिति है जो राजभाषा के विषय में नीति तय करती है।
  • इस समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते है। 

राजभाषा विभाग का गठन


गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग का गठन 

गृह मंत्रालय के अधीन 1975 में राजभाषा विभाग की स्थापना की गई । सन 1960 में हिंदी न जानने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी सेवा कालीन प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया । इसके बाद 1974 में केन्द्र सरकार के सभी उपक्रमों, निगमों और राष्ट्रीयकृत बैंको आदि में हिंदी प्रशिक्षण को अनिवार्य कर दिया गया। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन विभिन्न स्थानों पर स्थापित केन्द्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी टंकण, हिंदी आशुलिपि तथा निम्नलिखित की व्यवस्था की जाती है ।


पाठ्यक्रम                     हिंदी भाषा का प्रशिक्षण तीन स्तरों पर दिया जाता है ।
(क) प्रबोध                    यह प्रारंभिक पाठ्यक्रम है जिसका स्तर प्राथमिक स्कूल की हिंदी के बराबर है ।
(ख)प्रवीण                    यह माध्यमिक स्तर का पाठ्यक्रम है जो मिडिल स्कूल की हिंदी के बराबर है ।
(ग) प्राज्ञ                       यह अंतिम पाठ्यक्रम है और इसका स्तर हाई स्कूल की हिंदी के बराबर है ।
(घ) हिंदी टंकण             25 शब्द प्रति मिनट
(ड़) हिंदी आशुलिपि       80/100 शब्द प्रति मिनट  
                            

हिंदी प्रवीणता प्राप्त स्टाफ की परिभाषा


यदि किसी कर्मचारी ने - 

(क) मैट्रिक परीक्षा या उसकी समतूल्य या उससे उच्चतर कोई परीक्षा हिंदी के साथ उत्तीर्ण कर ली है : या 

(ख) केंद्रीय सरकार की हिंदी प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत आयोजित प्राज्ञ परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है 

(ग) यदि वह इन नियमों के उपाबध्द प्रारुप में घोषणा करता है कि उसने हिंदी का ज्ञान प्राप्त कर लिया है, उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है । 

हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान (नियम 9 और 10 देखिए ) 

यदि वह यह घोषणा करता है कि उसे हिंदी में प्रवीणता प्राप्त है और वह हिंदी का कार्य साधक ज्ञान रखता है तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने हिंदी में प्रवीणता प्राप्त कर ली है ।



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