रेलवे राजभाषा प्रश्नावली भाग 4: संक्षिप्त टिप्पणियाँ उत्तर सहित
रेलवे के राजभाषा प्रश्नावली के इस भाग में 16 महत्त्वपूर्ण विषयों पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ दी गई हैं। ये उत्तर सरल हिंदी में तैयार किए गए हैं, ताकि रेलवे अधिकारी और कर्मचारी प्रशिक्षण तथा परीक्षा की तैयारी में इनका उपयोग कर सकें।
प्रश्न 1. रेलवे सप्ताह पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: रेलवे सप्ताह भारतीय रेलवे की उपलब्धियों, सेवाओं और योगदान को याद करने तथा रेल कर्मचारियों के कार्यों को सम्मानित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। भारतीय रेलवे में रेलवे सप्ताह के अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को पुरस्कार दिए जाते हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर समारोह आयोजित किए जाते हैं।
भारतीय रेलवे की पहली यात्री रेलगाड़ी 16 अप्रैल 1853 को मुंबई (तत्कालीन बंबई) से ठाणे के बीच चली थी। यह भारतीय रेल इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना है।
प्रश्न 2. राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) में निर्दिष्ट सरकारी दस्तावेजों के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का प्रयोग अनिवार्य है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित दस्तावेज शामिल हैं:
संकल्प और सामान्य आदेश।
नियम और अधिसूचनाएँ।
प्रशासनिक तथा अन्य प्रतिवेदन।
प्रेस विज्ञप्तियाँ।
संसद के किसी सदन या दोनों सदनों के समक्ष रखे जाने वाले प्रशासनिक प्रतिवेदन और राजकीय कागजपत्र।
केंद्र सरकार की ओर से निष्पादित अनुबंध, करार, लाइसेंस, परमिट, नोटिस और निविदा प्रपत्र।
इन दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में तैयार करना तथा जारी करना आवश्यक है। ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वे दोनों भाषाओं में जारी हों।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3)।
प्रश्न 3. हिंदी सप्ताह कब और क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है। इसी अवसर के आसपास अनेक सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में हिंदी सप्ताह या हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया जाता है। आयोजन की अवधि संबंधित कार्यालय के निर्देशों के अनुसार निर्धारित हो सकती है।
14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। हिंदी दिवस और हिंदी सप्ताह मनाने का उद्देश्य हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना, कर्मचारियों में राजभाषा संबंधी जागरूकता बढ़ाना तथा सरकारी कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर हिंदी निबंध, टिप्पणी-लेखन, अनुवाद, प्रश्नोत्तरी और अन्य प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा सकती हैं।
प्रश्न 4. भारतीय रेलवे में राजभाषा संगठन के स्वरूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारतीय रेलवे में राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर राजभाषा व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देना और निर्धारित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना है।
राजभाषा व्यवस्था के प्रमुख स्तर इस प्रकार समझे जा सकते हैं:
रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड: रेलवे के प्रशासनिक स्तर पर राजभाषा संबंधी नीति, निर्देश और समन्वय का कार्य किया जाता है।
रेलवे बोर्ड का राजभाषा निदेशालय: रेलवे में राजभाषा संबंधी कार्यों, निर्देशों और कार्यक्रमों के समन्वय में भूमिका निभाता है।
क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयाँ: अपने प्रशासनिक क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग और राजभाषा कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की व्यवस्था करती हैं।
मंडल कार्यालय: मंडल स्तर पर राजभाषा कार्यों, निरीक्षण, प्रशिक्षण तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा की जाती है।
राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ: संबंधित प्रशासनिक स्तर पर हिंदी के प्रयोग की समीक्षा करती हैं और आवश्यक सुधारों के लिए सुझाव देती हैं।
विभिन्न स्तरों पर राजभाषा अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित प्रशासनिक आदेशों के अनुसार होती है।
प्रश्न 5. ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ क्षेत्रों के लिए निर्धारित जाँच बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: राजभाषा नियमों के अंतर्गत केंद्र सरकार के कार्यालयों को ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। हिंदी के प्रगामी प्रयोग की समीक्षा के लिए कार्यालयों में निर्धारित जाँच बिंदु बनाए जाते हैं।
इन जाँच बिंदुओं के अंतर्गत सामान्यतः निम्नलिखित विषयों की समीक्षा की जा सकती है:
हिंदी में प्राप्त पत्रों और उनके उत्तरों की स्थिति।
हिंदी में मूल पत्राचार और टिप्पणी-लेखन।
हिंदी तथा अंग्रेजी में जारी किए जाने वाले निर्धारित दस्तावेज।
हिंदी में प्रपत्रों, रजिस्टरों, नामपट्टों और कार्यालयी सामग्री का प्रयोग।
हिंदी प्रशिक्षण तथा कर्मचारियों के हिंदी ज्ञान की स्थिति।
राजभाषा संबंधी निरीक्षण, बैठकों और रिपोर्टों का कार्यान्वयन।
वार्षिक राजभाषा कार्यक्रम में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति।
‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ क्षेत्रों के लिए हिंदी प्रयोग के लक्ष्य तथा पत्राचार के निर्धारित प्रतिशत संबंधित वर्ष के वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार देखे जाने चाहिए। इन लक्ष्यों को स्थायी मानकर याद नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 6. राजभाषा नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी किसकी होती है?
उत्तर: राजभाषा नियम, 1976 के नियम 12 के अनुसार प्रत्येक केंद्रीय सरकारी कार्यालय का प्रशासनिक प्रधान अधिनियम और नियमों के उपबंधों का उचित अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होता है।
प्रशासनिक प्रधान को कार्यालय में प्रभावी जाँच बिंदु स्थापित करने तथा उनके माध्यम से राजभाषा संबंधी कार्यों की समीक्षा करने की व्यवस्था करनी होती है।
इसलिए कार्यालय में राजभाषा नियमों का पालन सुनिश्चित करना केवल राजभाषा अनुभाग का कार्य नहीं है; इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी कार्यालय के प्रधान की भी होती है।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा नियम, 1976 का नियम 12।
प्रश्न 7. कर्मचारी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: राजभाषा नियम, 1976 के नियम 2 के अनुसार, “कर्मचारी” से केंद्रीय सरकारी कार्यालय में नियोजित कोई भी व्यक्ति अभिप्रेत है।
इन नियमों में केंद्रीय सरकारी कार्यालय की परिभाषा में मंत्रालय, विभाग, केंद्र सरकार का कार्यालय तथा केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त आयोग, समिति या अधिकरण का कार्यालय शामिल है। केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले निगमों और कंपनियों के कार्यालय भी निर्धारित परिभाषा में शामिल हैं।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा नियम, 1976 का नियम 2।
प्रश्न 8. अधिसूचित कार्यालय से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: राजभाषा नियम, 1976 के नियम 2 के अनुसार, “अधिसूचित कार्यालय” वह कार्यालय है जिसे नियम 10 के उपनियम (4) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया हो।
नियम 10(4) के अंतर्गत केंद्र सरकार आदेश द्वारा ऐसे कार्यालयों को निर्दिष्ट कर सकती है जहाँ हिंदी में प्रवीणता प्राप्त कर्मचारियों द्वारा टिप्पणी, प्रारूपण और आदेश में बताए गए अन्य सरकारी प्रयोजनों के लिए केवल हिंदी का प्रयोग किया जाएगा।
अतः प्रत्येक सरकारी कार्यालय स्वतः अधिसूचित कार्यालय नहीं होता। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिसूचना आवश्यक है।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा नियम, 1976 के नियम 2 और नियम 10(4)।
प्रश्न 9. हिंदी के कार्यसाधक ज्ञान से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान वह ज्ञान है जिसे राजभाषा नियम, 1976 के नियम 10 में निर्धारित किया गया है।
नियम 10 के अनुसार कर्मचारी को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त माना जा सकता है, यदि उसने निर्धारित शर्तों में से कोई शर्त पूरी की हो। इनमें हिंदी विषय के साथ मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण करना, केंद्रीय सरकार की हिंदी परीक्षा योजना के अंतर्गत निर्धारित प्राज्ञ परीक्षा या निर्दिष्ट परीक्षा उत्तीर्ण करना, अथवा सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अन्य परीक्षा उत्तीर्ण करना शामिल है। निर्धारित प्रपत्र में घोषणा का विकल्प भी नियम में दिया गया है।
नियम 10(2) के अनुसार यदि किसी केंद्रीय सरकारी कार्यालय के 80 प्रतिशत या अधिक कर्मचारियों ने हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है, तो सामान्यतः उस कार्यालय के कर्मचारियों के बारे में ऐसा माना जाएगा।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा नियम, 1976 का नियम 10।
प्रश्न 10. हिंदी में प्रवीणता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: हिंदी में प्रवीणता का अर्थ राजभाषा नियम, 1976 के नियम 9 में निर्धारित शर्तों के अनुसार हिंदी में दक्षता प्राप्त होना है।
नियम 9 के अनुसार किसी कर्मचारी को हिंदी में प्रवीणता प्राप्त माना जाएगा, यदि उसने:
मैट्रिक या समकक्ष अथवा उससे उच्चतर परीक्षा हिंदी माध्यम से उत्तीर्ण की हो; या
स्नातक या समकक्ष अथवा उससे उच्चतर परीक्षा में हिंदी को वैकल्पिक विषय के रूप में लिया हो; या
नियमों से संलग्न निर्धारित प्रपत्र में हिंदी में प्रवीणता प्राप्त होने की घोषणा की हो।
यह परिभाषा राजभाषा नियमों में निर्धारित प्रयोजनों के लिए लागू होती है।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा नियम, 1976 का नियम 9।
प्रश्न 11. राजभाषा नियम, 1976 के नियम 8(4) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: नियम 8(4) के अनुसार केंद्र सरकार आदेश द्वारा ऐसे अधिसूचित कार्यालयों को निर्दिष्ट कर सकती है जहाँ हिंदी में प्रवीणता प्राप्त कर्मचारियों द्वारा टिप्पणी, प्रारूपण तथा आदेश में विनिर्दिष्ट अन्य सरकारी प्रयोजनों के लिए केवल हिंदी का प्रयोग किया जाएगा।
इस प्रावधान का उद्देश्य निर्धारित कार्यालयों में हिंदी में प्रवीणता रखने वाले कर्मचारियों द्वारा निर्दिष्ट सरकारी कार्य हिंदी में कराना है।
यह प्रावधान अपने आप प्रत्येक सरकारी कार्यालय पर लागू नहीं होता। इसके लिए संबंधित कार्यालय का अधिसूचित होना आवश्यक है।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा नियम, 1976 का नियम 8(4)।
प्रश्न 12. अराजपत्रित हिंदी पदों के नाम लिखिए।
उत्तर: अराजपत्रित हिंदी पदों के उदाहरण निम्नलिखित हो सकते हैं:
हिंदी अनुवादक।
वरिष्ठ हिंदी अनुवादक।
कनिष्ठ हिंदी अनुवादक।
हिंदी टंकक या हिंदी टाइपिस्ट।
हिंदी आशुलिपिक।
हिंदी टंकण या हिंदी वर्ड प्रोसेसिंग से संबंधित पद।
महत्त्वपूर्ण टिप्पणी: इन पदों के वास्तविक नाम, वेतन स्तर और राजपत्रित या अराजपत्रित स्थिति संबंधित विभाग की स्वीकृत पद-संरचना और भर्ती नियमों पर निर्भर करती है। रेलवे में पदों की आधिकारिक सूची के लिए संबंधित रेलवे बोर्ड के आदेशों का संदर्भ लें।
प्रश्न 13. सामान्य आदेश की परिभाषा दीजिए तथा इसके अंतर्गत आने वाले किन्हीं छह दस्तावेजों के नाम बताइए।
उत्तर: सामान्य आदेश ऐसे आदेश, निर्णय, निर्देश और परिपत्र होते हैं जो विभागीय उपयोग के लिए जारी किए जाते हैं, स्थायी प्रकृति के होते हैं अथवा सरकारी कर्मचारियों के किसी समूह या समूहों से संबंधित होते हैं।
राजभाषा विभाग की आधिकारिक सामग्री में सामान्य आदेश की व्याख्या के अंतर्गत निम्न प्रकार के दस्तावेजों का उल्लेख मिलता है:
स्थायी प्रकृति के आदेश।
विभागीय निर्णय।
सरकारी निर्देश।
परिपत्र।
सरकारी कर्मचारियों के समूह से संबंधित पत्र।
ज्ञापन या मेमोरेंडम।
नोटिस।
इन दस्तावेजों में से किसी दस्तावेज का धारा 3(3) के अंतर्गत सामान्य आदेश के रूप में वर्गीकरण उसके उद्देश्य और प्रकृति के अनुसार किया जाता है।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा विभाग की राजभाषा नीति संबंधी सामग्री में “Definition of General Orders”।
प्रश्न 14. मूल पत्राचार से क्या अभिप्राय है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर: मूल पत्राचार से अभिप्राय उस पत्राचार से है जो कोई कार्यालय स्वयं किसी अन्य कार्यालय, अधिकारी, संस्था या व्यक्ति को अपनी ओर से भेजता है।
उदाहरण के लिए, यदि रेलवे का कोई मंडल कार्यालय किसी अन्य कार्यालय को अपने विषय से संबंधित पत्र जारी करता है, तो वह उस कार्यालय का मूल पत्राचार होगा।
मूल पत्राचार की समीक्षा राजभाषा कार्यक्रम के लक्ष्यों और लागू नियमों के अनुसार की जाती है। इसके अंतर्गत हिंदी में भेजे गए पत्रों की संख्या तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति का आकलन किया जा सकता है।
प्रश्न 15. संविधान के अनुच्छेद 350 के अनुसार किसी व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन देने संबंधी प्रावधान समझाइए।
उत्तर: संविधान के अनुच्छेद 350 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति किसी व्यथा के निवारण के लिए संघ या राज्य के किसी अधिकारी अथवा प्राधिकारी को, यथास्थिति, संघ या राज्य में प्रयोग होने वाली किसी भाषा में अभ्यावेदन देने का हकदार है।
इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति को अपनी शिकायत या समस्या के समाधान के लिए अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। अभ्यावेदन की भाषा के संबंध में अनुच्छेद 350 में निर्धारित व्यवस्था लागू होती है।
आधिकारिक संदर्भ: भारत का संविधान, अनुच्छेद 350 — राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय।
प्रश्न 16. संसदीय राजभाषा समिति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: संसदीय राजभाषा समिति का गठन राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के अंतर्गत किया जाता है। इसका प्रमुख कार्य संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग में हुई प्रगति की समीक्षा करना और अपनी सिफारिशों सहित राष्ट्रपति को रिपोर्ट प्रस्तुत करना है।
समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं:
लोकसभा के 20 सदस्य।
राज्यसभा के 10 सदस्य।
समिति हिंदी के प्रगामी प्रयोग, सरकारी कामकाज में हिंदी की स्थिति और संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा करती है। राष्ट्रपति रिपोर्ट पर विचार करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्देश जारी कर सकते हैं।
आधिकारिक संदर्भ: राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4।
परीक्षा के लिए त्वरित पुनरावृत्ति
धारा 3(3): निर्दिष्ट दस्तावेज हिंदी और अंग्रेजी दोनों में।
नियम 2: कर्मचारी, अधिसूचित कार्यालय और क्षेत्रों की परिभाषाएँ।
नियम 8(4): अधिसूचित कार्यालयों में निर्दिष्ट कार्यों के लिए हिंदी का प्रयोग।
नियम 9: हिंदी में प्रवीणता।
नियम 10: हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान।
नियम 12: कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान की जिम्मेदारी।
अनुच्छेद 350: व्यथा के निवारण के लिए अभ्यावेदन देने का अधिकार।
संसदीय राजभाषा समिति: कुल 30 सदस्य — लोकसभा से 20 और राज्यसभा से 10।
आधिकारिक स्रोत
राजभाषा नियम, 1976 — राजभाषा विभाग
राजभाषा अधिनियम, 1963 — राजभाषा विभाग
संविधान के राजभाषा संबंधी प्रावधान — राजभाषा विभाग
राजभाषा विभाग की राजभाषा नीति संबंधी सामग्री
