हिंदी के कार्यसाधक ज्ञान एवं हिंदी में प्रवीणता में अंतर
(Difference between Working Knowledge of Hindi and Proficiency in Hindi)
राजभाषा नियम, 1976 के अंतर्गत "हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान" (Working Knowledge of Hindi) तथा "हिंदी में प्रवीणता" (Proficiency in Hindi) दो अलग-अलग स्तर की भाषाई योग्यताएँ हैं। हिंदी में प्रवीणता का स्तर कार्यसाधक ज्ञान से उच्च माना जाता है।
| क्र. | हिंदी में कार्यसाधक ज्ञान (Working Knowledge of Hindi) | हिंदी में प्रवीणता (Proficiency in Hindi) |
|---|---|---|
| 1 | हिंदी में सामान्य कार्यालयी कार्य करने की क्षमता। | हिंदी भाषा पर उच्च स्तर की दक्षता एवं अधिकार। |
| 2 | राजभाषा नियम, 1976 के नियम 10 में वर्णित है। | राजभाषा नियम, 1976 के नियम 9 में वर्णित है। |
| 3 | कर्मचारी को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त माना जाएगा यदि उसने मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा में हिंदी एक विषय के रूप में उत्तीर्ण की हो। | कर्मचारी को हिंदी में प्रवीण माना जाएगा यदि उसने मैट्रिक या उच्च परीक्षा हिंदी माध्यम से उत्तीर्ण की हो। |
| 4 | यदि कर्मचारी ने केंद्र सरकार की हिंदी शिक्षण योजना की प्राज्ञ (Pragya) परीक्षा अथवा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य परीक्षा उत्तीर्ण की हो तो भी उसे कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त माना जाएगा। | यदि कर्मचारी ने स्नातक या उससे उच्च परीक्षा में हिंदी को वैकल्पिक (Elective) विषय के रूप में लिया हो तो उसे हिंदी में प्रवीण माना जाएगा। |
| 5 | कर्मचारी निर्धारित प्रपत्र में घोषणा देकर भी कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त होने का दावा कर सकता है। | कर्मचारी निर्धारित प्रपत्र में घोषणा देकर हिंदी में प्रवीणता का दावा कर सकता है। |
| 6 | इसका उद्देश्य कर्मचारी को हिंदी में दैनिक कार्यालयी कार्य करने योग्य बनाना है। | इसका उद्देश्य कर्मचारी को हिंदी में प्रभावी लेखन, अभिव्यक्ति एवं प्रशासनिक कार्य करने योग्य बनाना है। |
| 7 | साधारण नोटिंग, ड्राफ्टिंग एवं पत्राचार करने की क्षमता। | उच्च स्तरीय नोटिंग, ड्राफ्टिंग, अनुवाद एवं प्रशासनिक कार्य करने की क्षमता। |
| 8 | यह हिंदी का न्यूनतम कार्यकारी स्तर (Minimum Functional Level) है। | यह हिंदी का उन्नत स्तर (Advanced Level) है। |
| 9 | कार्यसाधक ज्ञान रखने वाला कर्मचारी हिंदी में काम कर सकता है। | प्रवीण कर्मचारी हिंदी में दक्षता एवं प्रभावशीलता के साथ कार्य कर सकता है। |
| 10 | प्रवीणता की तुलना में निम्न स्तर की योग्यता। | कार्यसाधक ज्ञान से उच्च स्तर की योग्यता। |
राजभाषा नियमों के अनुसार
हिंदी में प्रवीणता (Rule 9)
किसी कर्मचारी को हिंदी में प्रवीण माना जाएगा यदि—
उसने मैट्रिक अथवा समकक्ष या उससे उच्च परीक्षा हिंदी माध्यम से उत्तीर्ण की हो; अथवा
उसने स्नातक या उससे उच्च परीक्षा में हिंदी को वैकल्पिक (Elective) विषय के रूप में लिया हो; अथवा
उसने निर्धारित प्रपत्र में हिंदी में प्रवीणता की घोषणा की हो।
हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान (Rule 10)
किसी कर्मचारी को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त माना जाएगा यदि—
उसने मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा में हिंदी को एक विषय के रूप में पढ़ा हो; अथवा
हिंदी शिक्षण योजना की प्राज्ञ परीक्षा या सरकार द्वारा निर्दिष्ट अन्य परीक्षा उत्तीर्ण की हो; अथवा
उसने निर्धारित प्रपत्र में कार्यसाधक ज्ञान की घोषणा की हो।
LDCE / Group 'B' परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
एक पंक्ति में अंतर
कार्यसाधक ज्ञान (Working Knowledge) = हिंदी में सामान्य कार्यालयी कार्य करने की क्षमता।
प्रवीणता (Proficiency) = हिंदी भाषा में उच्च स्तर की दक्षता एवं प्रभावी अभिव्यक्ति की क्षमता।
परीक्षा में अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न
प्रश्न: हिंदी में प्रवीणता और कार्यसाधक ज्ञान में कौन उच्च है?
उत्तर:
हिंदी में प्रवीणता (Proficiency in Hindi), हिंदी के कार्यसाधक ज्ञान (Working Knowledge of Hindi) से उच्च स्तर की योग्यता है।
Difference between Working Knowledge of Hindi and Proficiency in Hindi
Under the Official Languages Rules, 1976, Working Knowledge of Hindi and Proficiency in Hindi are two distinct levels of linguistic competence. Proficiency in Hindi is considered a higher qualification than Working Knowledge of Hindi.
Working Knowledge of Hindi (Rule 10)
An employee is deemed to possess Working Knowledge of Hindi if:
He/She has passed Matriculation or an equivalent examination with Hindi as one of the subjects; or
Has passed the Pragya Examination under the Hindi Teaching Scheme or any other examination specified by the Government; or
Declares that he/she possesses Working Knowledge of Hindi in the prescribed form.
Proficiency in Hindi (Rule 9)
An employee is deemed to possess Proficiency in Hindi if:
He/She has passed Matriculation or a higher examination with Hindi as the medium of examination; or
Has taken Hindi as an elective subject in a degree or higher examination; or
Declares proficiency in Hindi in the prescribed form.
Examination Point
Working Knowledge of Hindi = Ability to perform routine official work in Hindi.
Proficiency in Hindi = Advanced competence and effective use of Hindi in official work.
Proficiency in Hindi > Working Knowledge of Hindi

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