भारत सरकार एवं भारतीय रेल में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ाने हेतु सुझाव
भारत सरकार की राजभाषा नीति का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का प्रगतिशील प्रयोग बढ़ाना तथा राजभाषा अधिनियम, 1963 एवं राजभाषा नियम, 1976 के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करना है। वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology), ई-ऑफिस (e-Office), डिजिटल संचार तथा ऑनलाइन कार्य प्रणालियों के विस्तार के कारण हिंदी में कार्य करना पहले की अपेक्षा अधिक सरल हो गया है। अतः भारत सरकार एवं भारतीय रेल के कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं।
1. हिंदी प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण
कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए नियमित हिंदी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए।
हिंदी में नोटिंग, ड्राफ्टिंग तथा ई-ऑफिस कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाए।
हिंदी टंकण (Hindi Typing) एवं यूनिकोड (Unicode) आधारित कार्य प्रणाली का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए।
नव नियुक्त कर्मचारियों को प्रारंभ से ही हिंदी में कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया जाए।
2. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी का अधिक प्रयोग
ई-ऑफिस, HRMS, IPAS, IREPS तथा अन्य सरकारी पोर्टलों में हिंदी इंटरफेस का अधिकाधिक उपयोग किया जाए।
सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर एवं अनुप्रयोगों (Applications) में हिंदी में कार्य करने की सुविधा विकसित एवं प्रोत्साहित की जाए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) एवं अनुवाद उपकरणों का उपयोग कर हिंदी में कार्य करना आसान बनाया जाए।
सरकारी वेबसाइटों एवं पोर्टलों पर हिंदी सामग्री नियमित रूप से अद्यतन की जाए।
3. कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का व्यापक उपयोग
कार्यालय आदेश, परिपत्र (Circulars), अधिसूचनाएं, सूचना-पत्र एवं सामान्य पत्राचार हिंदी में जारी किए जाएं।
रजिस्टरों, प्रपत्रों (Forms), अभिलेखों तथा रिपोर्टों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाया जाए।
नोटशीट (Note Sheet) एवं टिप्पणियां (Notes) हिंदी में लिखने हेतु कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाए।
विभागीय बैठकों की कार्यवाही यथासंभव हिंदी में तैयार की जाए।
4. राजभाषा प्रोत्साहन योजनाओं को प्रभावी बनाना
हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों को पुरस्कृत किया जाए।
हिंदी निबंध, टिप्पणी, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी एवं लेखन प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन किया जाए।
हिंदी पखवाड़ा एवं हिंदी माह को केवल औपचारिकता न मानकर परिणामोन्मुखी बनाया जाए।
उत्कृष्ट राजभाषा कार्य करने वाले कार्यालयों को विशेष मान्यता प्रदान की जाए।
5. तकनीकी एवं वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी
तकनीकी, वाणिज्यिक, इंजीनियरिंग तथा प्रशासनिक विषयों की शब्दावली को सरल एवं व्यवहारिक बनाया जाए।
जटिल शब्दों के स्थान पर प्रचलित एवं सहज हिंदी शब्दों का प्रयोग किया जाए।
आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी शब्दों को हिंदी के साथ कोष्ठक में अंग्रेजी में भी लिखा जा सकता है।
प्रशिक्षण सामग्री एवं अध्ययन पुस्तिकाएं हिंदी में उपलब्ध कराई जाएं।
6. भारतीय रेल में विशेष पहल
स्टेशन, मंडल एवं जोनल कार्यालयों में हिंदी में कार्य करने के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जाए।
रेलवे बोर्ड, जोनल रेलवे एवं मंडल स्तर पर जारी होने वाले महत्वपूर्ण निर्देश द्विभाषी (Bilingual) रूप में उपलब्ध कराए जाएं।
वाणिज्य, कार्मिक, परिचालन, इंजीनियरिंग तथा अन्य विभागों की कार्यप्रणालियों से संबंधित संदर्भ सामग्री हिंदी में उपलब्ध कराई जाए।
रेल कर्मचारियों को हिंदी में आवेदन, प्रतिवेदन एवं पत्राचार करने हेतु प्रोत्साहित किया जाए।
7. जनसंपर्क एवं यात्री सेवाओं में हिंदी
यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सूचनाओं में हिंदी का प्रभावी उपयोग किया जाए।
घोषणाओं, सूचना पट्टों, पुस्तिकाओं तथा जनसंपर्क सामग्री में हिंदी को प्रमुख स्थान दिया जाए।
डिजिटल सूचना प्रणालियों में हिंदी सामग्री की गुणवत्ता एवं शुद्धता सुनिश्चित की जाए।
8. अधिकारियों की सक्रिय भूमिका
वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं हिंदी में कार्य कर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
निरीक्षण टिप्पणियां, समीक्षाएं तथा प्रशासनिक निर्देश यथासंभव हिंदी में जारी किए जाएं।
अधीनस्थ कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने हेतु प्रेरित एवं मार्गदर्शित किया जाए।
9. सरल एवं व्यवहारिक हिंदी का प्रयोग
राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार का उद्देश्य कार्य को जटिल बनाना नहीं, बल्कि उसे सरल एवं प्रभावी बनाना है। इसलिए ऐसी हिंदी का प्रयोग किया जाना चाहिए जो सहज, स्पष्ट, व्यावहारिक एवं सभी कर्मचारियों द्वारा आसानी से समझी जा सके। आवश्यकता होने पर प्रचलित तकनीकी अथवा अंग्रेजी शब्दों का देवनागरी लिपि में प्रयोग भी किया जा सकता है, जिससे कार्य निष्पादन एवं संप्रेषण में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
भारत सरकार एवं भारतीय रेल में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए केवल नियमों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सकारात्मक सोच, प्रशिक्षण, तकनीकी सुविधाओं, प्रोत्साहन योजनाओं तथा अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। डिजिटल युग में हिंदी में कार्य करना पहले से कहीं अधिक सरल हो गया है। यदि सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास किए जाएं, तो राजभाषा हिंदी का प्रयोग प्रशासनिक कार्यों में और अधिक प्रभावी, व्यापक तथा परिणामकारी बनाया जा सकता है।

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